
विकसित महाराष्ट्र के लिए शिक्षा विषय पर महाराष्ट्र ज्ञानसभा का आयोजन
नागपुर 04 अप्रैल : भारतीय ज्ञान का वैश्वीकरण तथा वैश्विक ज्ञान के भारतीयकरण के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार किया जा सकता है। यह बात महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। ‘विकसित महाराष्ट्र के लिए शिक्षा’ विषय पर आयोजित इस उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी ने की। इस अवसर पर माननीय राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, वीएनआईटी शासी मंडल के अध्यक्ष डॉ. मदभूषी मदन गोपाल, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर, गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. प्रशांत बोकारे, भारतीय प्रबंधन संस्थान नागपुर के संचालक डॉ. भीमराया मेत्री, वीएनआईटी के संचालक डॉ. प्रेम लाल पटेल तथा लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष डॉ. रवलीनसिंह खुराना प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सभागार में महाराष्ट्र ज्ञानसभा का आयोजन किया गया है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, गोंडवाना विश्वविद्यालय गडचिरोली, विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान, नागपुर तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महाराष्ट्र ज्ञानसभा के उद्घाटन अवसर पर शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस मार्गदर्शन कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने आगे कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैश्विक ज्ञान के समन्वय से शाश्वत ज्ञान के माध्यम से जीवन पद्धति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वर्णिम इतिहास रहा है। जब विश्व में विश्वविद्यालय की संकल्पना भी नहीं थी, तब भारत में नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला और काशी जैसे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे। इन विश्वविद्यालयों में खगोलशास्त्र, भूगोल, शल्यचिकित्सा, विज्ञान, व्याकरण, वास्तुकला आदि सभी क्षेत्रों में उच्चतम स्तर का ज्ञान दिया जाता था। इससे स्पष्ट होता है कि भारत ज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत समृद्ध था, जिसका उल्लेख चीनी यात्रियों के लेखन में भी मिलता है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने जोर देकर कहा कि केवल इतिहास बताने से हम महान नहीं बन सकते, बल्कि इतिहास और वर्तमान को साथ लेकर भविष्य का सामना करना होगा। भारत का स्वर्णिम इतिहास हमें वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का साहस देता है।
विश्व के विकास की गति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पहली औद्योगिक क्रांति 1760 में हुई, दूसरी के बीच लगभग 80 वर्षों का अंतर था, जबकि तीसरी औद्योगिक क्रांति आने में लगभग 250 वर्ष लगे। चौथी और पाँचवीं औद्योगिक क्रांति 2010 से 2020 के बीच प्रारंभ हुई और विश्व अब छठी औद्योगिक क्रांति के चरण में प्रवेश कर रहा है। हाल की तीन औद्योगिक क्रांतियाँ केवल 15 वर्षों में हुई हैं, जिससे स्पष्ट है कि विश्व तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि हम इस गति को नहीं समझेंगे तो पीछे रह जाएंगे।
उन्होंने कहा कि चौथी, पाँचवीं और छठी औद्योगिक क्रांतियों को गति देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन क्रांतियों में भारतीय मूल के लोगों का भी बड़ा योगदान रहा है। इसलिए हमें भविष्य की चुनौतियों को समझते हुए उसी अनुसार शैक्षणिक नीति और मानव संसाधन तैयार करना होगा।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए जो नैतिकता और व्यावसायिक कौशल दोनों का विकास करे। यदि शिक्षा के माध्यम से बौद्धिक, भावनात्मक, नैतिक तथा व्यावसायिक क्षमताओं का विकास किया जाए, तो देश के विकास में योगदान देने वाली सशक्त पीढ़ी तैयार होगी।
विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा क्षेत्र की भूमिका क्या हो सकती है, इस पर मंथन करने के लिए यह आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में समाहित करना आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे पुराने और अप्रासंगिक पाठ्यक्रमों में परिवर्तन कर वर्तमान और सतत विकास की आवश्यकताओं के अनुसार नए पाठ्यक्रम तैयार करें तथा इसके लिए स्वयं को भी प्रशिक्षित करें।
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*विश्वविद्यालय तैयार करें कार्ययोजना – डॉ. प्रशांत नारनवरे*
महाराष्ट्र के राज्यपाल के मुख्य सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे ने कहा कि विकसित महाराष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने दावोस में हुए समझौतों तथा मुंबई में विदेशी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए सरकार द्वारा 300 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी।
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भारतीय ज्ञान परंपरा परिवर्तन का माध्यम – श्री अतुल कोठारी
श्री अतुल कोठारी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र के लिए शिक्षा नीति और वित्तीय नीति अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। श्री कोठारी ने यह भी कहा कि बिना अनुसंधान के कोई भी देश विकास नहीं कर सकता, इसलिए शोध की दिशा बदलना आवश्यक है। समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर से ही भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने पर जोर दिया गया है, इसलिए उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने ज्ञानसभा के महत्व को भी रेखांकित करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात के बाद महाराष्ट्र में यह छठी ज्ञानसभा आयोजित की जा रही है।
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स्वागत भाषण में वीएनआईटी के संचालक डॉ. प्रेम लाल पटेल ने ज्ञान को शक्ति बताते हुए इस आयोजन की भूमिका स्पष्ट की। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने किया तथा संचालन डॉ. कल्याणी काळे और डॉ. चिन्मयी निमखेडकर ने किया। इस कार्यक्रम में चारों शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रमुख, शिक्षक, विद्यार्थी, शोधकर्ता तथा देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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मा. संपादक / मुख्य प्रतिनिधि महोदय,
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